Sunday, 19 July 2020

Homeopathic Medicine for Hemophilia by Dr. Rukmani

Watch the following video of Dr. Rukmani:

https://youtu.be/sL9vS_9PA2U

Wednesday, 29 April 2020

100 जानकारियां जिसका ज्ञान सबको होना चाहिए

*100 जानकारियां जिसका ज्ञान सबको होना चाहिए*

1. योग, भोग और रोग ये तीन अवस्थाएं है।
2. *लकवा* - सोडियम की कमी के कारण होता है।
3. *हाई बी पी में* - स्नान व सोने से पूर्व एक गिलास जल का सेवन करें तथा स्नान करते समय थोड़ा-सा नमक पानी मे डालकर स्नान करे ।
4. *लो बी पी* - सेंधा नमक डालकर पानी पीयें ।
5. *कूबड़ निकलना*- फास्फोरस की कमी ।
6. *कफ* - फास्फोरस की कमी से कफ बिगड़ता है, फास्फोरस की पूर्ति हेतु आर्सेनिक की उपस्थिति जरुरी है। गुड व शहद खाएं
7. *दमा, अस्थमा* - सल्फर की कमी।
8. *सिजेरियन आपरेशन* - आयरन, कैल्शियम की कमी ।
9. *सभी क्षारीय वस्तुएं दिन डूबने के बाद खायें* ।
10. *अम्लीय वस्तुएं व फल दिन डूबने से पहले खायें* ।
11. *जम्भाई*- शरीर में आक्सीजन की कमी।
12. *जुकाम* - जो प्रातःकाल जूस पीते हैं वो उस में काला नमक व अदरक डालकर पियें ।
13. *ताम्बे का पानी* - प्रातः खड़े होकर नंगे पाँव पानी ना पियें।
14. *किडनी* - भूलकर भी खड़े होकर गिलास का पानी ना पिये।
15. *गिलास* एक रेखीय होता है तथा इसका सर्फेस टेन्शन अधिक होता है। गिलास अंग्रेजो (पुर्तगाल) की सभ्यता से आयी है। अतः लोटे का पानी पियें, लोटे का कम सर्फेस टेन्शन होता है।
16. *अस्थमा, मधुमेह, कैंसर* से गहरे रंग की वनस्पतियाँ बचाती हैं ।
17. *वास्तु* के अनुसार जिस घर में जितना खुला स्थान होगा, उस घर के लोगों का दिमाग व हृदय भी उतना ही खुला होगा ।
18. *परम्परायें* वहीं विकसित होगीं जहाँ जलवायु के अनुसार व्यवस्थायें विकसित होगीं ।
19. *पथरी* - अर्जुन की छाल से पथरी की समस्यायें ना के बराबर हो जाती है।
20. *RO* का पानी कभी ना पियें। यह गुणवत्ता को स्थिर नहीं रखता। कुएँ का पानी पियें। बारिश का पानी सबसे अच्छा, पानी की सफाई के लिए *सहिजन* की फली सबसे बेहतर है।
21. *सोकर उठते समय* हमेशा दायीं करवट से उठें या जिधर का *स्वर* चल रहा हो उधर करवट लेकर उठें ।
22. *पेट के बल सोने से* हर्निया, प्रोस्टेट, एपेंडिक्स की समस्या आती है ।
23. *भोजन* के लिए पूर्व दिशा, *पढाई* के लिए उत्तर दिशा बेहतर है ।
24. *HDL* बढ़ने से मोटापा कम होगा LDL व VLDL कम होगा ।
25. *गैस की समस्या* होने पर भोजन में अजवाइन मिलाना शुरू कर दें ।
26. *चीनी* के अन्दर सल्फर होता है जो कि पटाखों में प्रयोग होता है , यह शरीर में जाने के बाद बाहर नहीं निकलता है। चीनी खाने से *पित्त* बढ़ता है ।
27. *शुक्रोज* हजम नहीं होता है *फ्रेक्टोज* हजम होता है और भगवान् की हर मीठी चीज में फ्रेक्टोज है ।
28. *वात* के असर में नींद कम आती है ।
29. *कफ* के प्रभाव में व्यक्ति प्रेम अधिक करता है।
30. *कफ* के असर में पढाई कम होती है ।
31. *पित्त* के असर में पढाई अधिक होती है ।
33. *आँखों के रोग* - कैट्रेक्टस, मोतियाबिन्द, ग्लूकोमा , आँखों का लाल होना आदि ज्यादातर रोग कफ के कारण होता है ।
34. *शाम को वात*-नाशक चीजें खानी चाहिए ।
35. *प्रातः 4 बजे जाग जाना चाहिए* ।
36. *सोते समय* रक्त दबाव सामान्य या सामान्य से कम होता है ।
37. *व्यायाम* - *वात रोगियों* के लिए मालिश के बाद व्यायाम , *पित्त वालों* को व्यायाम के बाद मालिश करनी चाहिए । *कफ के लोगों* को स्नान के बाद मालिश करनी चाहिए ।
38. *भारत की जलवायु* वात प्रकृति की है , दौड़ की बजाय सूर्य नमस्कार करना चाहिए ।
39. *जो माताएं* घरेलू कार्य करती हैं उनके लिए व्यायाम जरुरी नहीं ।
40. *निद्रा* से *पित्त* शांत होता है , मालिश से *वायु* शांति होती है , उल्टी से *कफ* शांत होता है तथा *उपवास* (लंघन) से बुखार शांत होता है ।
41. *भारी वस्तुयें* शरीर का रक्तदाब बढाती है , क्योंकि उनका गुरुत्व अधिक होता है ।
42. *दुनियां के महान* वैज्ञानिक का स्कूली शिक्षा का सफ़र अच्छा नहीं रहा, चाहे वह 8 वीं फेल न्यूटन हों या 9 वीं फेल आइस्टीन हों ,
43. *माँस खाने वालों* के शरीर से अम्ल-स्राव करने वाली ग्रंथियाँ प्रभावित होती हैं ।
44. *तेल हमेशा* गाढ़ा खाना चाहिएं, सिर्फ लकडी वाली घाणी का , दूध हमेशा पतला पीना चाहिए ।
45. *छिलके वाली दाल-सब्जियों से कोलेस्ट्रोल हमेशा घटता है ।*
46. *कोलेस्ट्रोल की बढ़ी* हुई स्थिति में इन्सुलिन खून में नहीं जा पाता है । ब्लड शुगर का सम्बन्ध ग्लूकोस के साथ नहीं, अपितु कोलेस्ट्रोल के साथ है ।
47. *मिर्गी दौरे* में अमोनिया या चूने की गंध सूँघानी चाहिए ।
48. *सिरदर्द* में एक चुटकी नौसादर व अदरक का रस रोगी को सुंघायें ।
49. *भोजन के पहले* मीठा खाने से बाद में खट्टा खाने से शुगर नहीं होता है ।
50. *भोजन* के आधे घंटे पहले सलाद खाएं, उसके बाद भोजन करें ।
51. *अवसाद* में आयरन , कैल्शियम , फास्फोरस की कमी हो जाती है । फास्फोरस गुड और अमरुद में अधिक है
52. *पीले केले* में आयरन कम और कैल्शियम अधिक होता है । हरे केले में कैल्शियम थोडा कम लेकिन फास्फोरस ज्यादा होता है तथा लाल केले में कैल्शियम कम आयरन ज्यादा होता है । हर हरी चीज में भरपूर फास्फोरस होती है, वही हरी चीज पकने के बाद पीली हो जाती है जिसमे कैल्शियम अधिक होता है ।
53. *छोटे केले* में बड़े केले से ज्यादा कैल्शियम होता है ।
54. *रसौली* की गलाने वाली सारी दवाएँ चूने से बनती हैं ।
55. हेपेटाइट्स A से E तक के लिए चूना बेहतर है ।
56. *एंटी टिटनेस* के लिए हाईपेरियम 200 की दो-दो बूंद 10-10 मिनट पर तीन बार दे ।
57. *ऐसी चोट* जिसमे खून जम गया हो उसके लिए नैट्रमसल्फ दो-दो बूंद 10-10 मिनट पर तीन बार दें । बच्चो को एक बूंद पानी में डालकर दें ।
58. *मोटे लोगों में कैल्शियम* की कमी होती है अतः त्रिफला दें । त्रिकूट (सोंठ+ कालीमिर्च+ मघा पीपली) भी दे सकते हैं ।
59. *अस्थमा में नारियल दें।* नारियल फल होते हुए भी क्षारीय है ।दालचीनी + गुड + नारियल दें ।
60. *चूना* बालों को मजबूत करता है तथा आँखों की रोशनी बढाता है ।
61. *दूध* का सर्फेस टेंशन कम होने से त्वचा का कचरा बाहर निकाल देता है ।
62. *गाय का घी सबसे अधिक पित्तनाशक फिर कफ व वायुनाशक है ।*
63. *जिस भोजन* में सूर्य का प्रकाश व हवा का स्पर्श ना हो उसे नहीं खाना चाहिए।
64. *गौ-मूत्र अर्क आँखों में ना डालें ।*
65. *गाय के दूध* में घी मिलाकर देने से कफ की संभावना कम होती है लेकिन चीनी मिलाकर देने से कफ बढ़ता है ।
66. *मासिक के दौरान* वायु बढ़ जाता है , 3-4 दिन स्त्रियों को उल्टा सोना चाहिए इससे गर्भाशय फैलने का खतरा नहीं रहता है । दर्द की स्थति में गर्म पानी में देशी घी दो चम्मच डालकर पियें ।
67. *रात* में आलू खाने से वजन बढ़ता है ।
68. *भोजन के* बाद वज्रासन में बैठने से *वात* नियंत्रित होता है ।
69. *भोजन* के बाद कंघी करें। कंघी करते समय आपके बालों में कंघी के दांत चुभने चाहिए । बाल जल्द सफ़ेद नहीं होगे ।
70. *अजवाईन* अपान वायु को बढ़ा देता है, जिससे पेट की समस्यायें कम होती है
71. *अगर पेट* में मल बंध गया है तो अदरक का रस या सोंठ का प्रयोग करें।
72. *कब्ज* होने की अवस्था में सुबह पानी पीकर कुछ देर एडियों के बल चलना चाहिए ।
73. *रास्ता चलने*, श्रम कार्य के बाद थकने पर या धातु गर्म होने पर दायीं करवट लेटना चाहिए ।
74. *जो दिन मे दायीं करवट पर सोता है तथा रात्रि में बायीं करवट पर सोता है उसे थकान व शारीरिक पीड़ा कम होती है।*
75. *बिना कैल्शियम* की उपस्थिति के कोई भी विटामिन व पोषक तत्व पूर्ण कार्य नहीं करते है ।
76. *स्वस्थ व्यक्ति* सिर्फ 5 मिनट शौच में लगाता है ।
77. *भोजन* करते समय डकार आपके भोजन को पूर्ण और हाजमे को संतुष्टि का संकेत है ।
78. *सुबह के नाश्ते* में फल , *दोपहर को दही* व *रात्रि को दूध* का सेवन करना चाहिए ।
79. *रात्रि* को कभी भी अधिक प्रोटीन वाली वस्तुयें नहीं खानी चाहिए । जैसे - दाल , पनीर , राजमा , लोबिया आदि ।
80. *शौच और भोजन* के समय मुंह बंद रखें , भोजन के समय टी वी ना देखें ।
81. *मासिक चक्र* के दौरान स्त्री को ठंडे पानी से स्नान, व आग से दूर रहना चाहिए ।
82. *जो बीमारी जितनी देर से आती है, वह उतनी देर से जाती भी है ।*
83. *जो बीमारी अंदर से आती है, उसका समाधान भी अंदर से ही होना चाहिए।*
84. *एलोपैथी* ने एक ही चीज दी है , दर्द से राहत । आज एलोपैथी की दवाओं के कारण ही लोगों की किडनी, लीवर , आतें , हृदय ख़राब हो रहे हैं । एलोपैथी एक बिमारी खत्म करती है तो दस बिमारी देकर भी जाती है ।
85. *खाने* की वस्तु में कभी भी ऊपर से नमक नहीं डालना चाहिए, ब्लड-प्रेशर बढ़ता है ।
86 . *रंगों द्वारा* चिकित्सा करने के लिए इंद्रधनुष को समझ लें , पहले जामुनी , फिर नीला ... अंत में लाल रंग ।
87 . *छोटे* बच्चों को सबसे अधिक सोना चाहिए , क्योंकि उनमें वह कफ प्रवृत्ति होती है , स्त्री को भी पुरुष से अधिक विश्राम करना चाहिए।
88. *जो सूर्य निकलने* के बाद उठते हैं , उन्हें पेट की भयंकर बीमारियां होती है , क्योंकि बड़ी आँत मल को चूसने लगती है ।
89. *बिना शरीर की गंदगी* निकाले स्वस्थ शरीर की कल्पना निरर्थक है , मल-मूत्र से 5% , कार्बन डाई ऑक्साइड छोड़ने से 22 %, तथा पसीना निकलने से लगभग 70 % विजातीय तत्व शरीर से निकलते हैं ।
90. *चिंता , क्रोध , ईर्ष्या करने से गलत हार्मोन्स का निर्माण होता है जिससे कब्ज , बवासीर , अजीर्ण , अपच , रक्तचाप , थायरायड की समस्या उत्पन् होती है ।*
91. *गर्मियों में बेल , गुलकंद , तरबूजा , खरबूजा व सर्दियों में सफ़ेद मूसली , सोंठ का प्रयोग करें ।*
92. *प्रसव* के बाद माँ का पीला दूध बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता को 10 गुना बढ़ा देता है । यदि यह मिलता है तो बच्चो को टीके लगाने की आवश्यकता नहीं होती है ।
93. *रात को सोते समय* सर्दियों में देशी मधु लगाकर सोयें, त्वचा में निखार आएगा।
94. *दुनिया में कोई चीज व्यर्थ नहीं , हमें उपयोग करना आना चाहिए*।
95. *जो अपने दुखों* को दूर करके दूसरों के भी दुःखों को दूर करता है , वही मोक्ष का अधिकारी है ।
96. *सोने से* आधे घंटे पूर्व जल का सेवन करने से वायु नियंत्रित होती है, लकवा, हार्ट-अटैक का खतरा कम होता है ।
97. *स्नान से पूर्व और भोजन के बाद पेशाब जाने से रक्तचाप नियंत्रित होता है*।
98 . *तेज धूप* में चलने के बाद, शारीरिक श्रम करने के बाद, शौच से आने के तुरंत बाद जल का सेवन निषिद्ध है।
99. *त्रिफला अमृत है* जिससे *वात, पित्त, कफ* तीनो शांत होते हैं। इसके अतिरिक्त भोजन के बाद पान व चूना।
100. इस विश्व की सबसे मँहगी *दवा "लार"* है, जो प्रकृति ने तुम्हें अनमोल दी है, इसे तंबाकू, पान पराग के साथ व्यर्थ ना करें ।

 *जनजागृति हेतु लेख को पढ़ने के बाद साझा अवश्य करे।*

Thursday, 23 April 2020

Corona Truth by Dr. Biswaroop Roy Chowdhury


CORONA VIRUS TRUTH


Click on the links mentioned below: 

 
Coronavirus disease (COVID-19) is an communicable disease caused by a newly discovered coronavirus.

Most people infected with the COVID-19 virus will experience mild to moderate respiratory disease and recover without requiring special treatment. Older people, and people with underlying medical problems like disorder , diabetes, chronic respiratory illness , and cancer are more likely to develop serious illness.

The best thanks to prevent and hamper transmission is be informed about the COVID-19 virus, the disease it causes and the way it spreads. Protect yourself et al. from infection by washing your hands or using an alcohol based rub frequently and not touching your face.

The COVID-19 virus spreads primarily through droplets of saliva or discharge from the nose when an infected person coughs or sneezes, so it’s important that you simply also practice respiratory etiquette (for example, by coughing into a flexed elbow).

At this point , there are not any specific vaccines or treatments for COVID-19. However, there are many ongoing clinical trials evaluating potential treatments. WHO will still provide updated information as soon as clinical findings become available.

Thursday, 18 April 2019

*What You Need to Know About Haemophilia*



1) Haemophilia is a genetic bleeding disorder that can be fatal if it occurs within a vital organ like the brain.

2)Haemepholia tends to affect men more than women as the gene can be passed from mother to son. It is estimated that 1 in every 5,000 males is born with this condition.

3) The two major types of hemophilia are - haemophilia A (caused by a deficiency in factor VIII) and haemophilia B (caused by a deficiency of factor IX). Hemophilia C  is a mild form of the disorder that’s caused by a deficiency of factor XI.

4) Haemophilia occurs because of a defect in one of the clotting factor genes on the X chromosome. Males have XY sex chromosomes and females have two XX sex chromosomes. Since males lack a second X chromosome they are unable to make up for the defective gene, increasing their risk of having a disease like haemophilia if they inherit an affected X chromosome that has a mutation in either the factor VIII or factor IX - these genes are located on the X chromosome.

5) However, the disorder can be acquired sometimes because of a spontaneous genetic mutation. It is estimated that about one-third of new cases are caused by a new mutation of the gene in the mother or the child.

6) The signs and symptoms of haemophilia can vary, depending on the severity of your factor deficiency or the level of clotting factors you have in the blood. The main symptom of haemophilia is bleeding that doesn’t stop, also known as prolonged bleeding. People with this bleeding disorder may have - skin that bruises easily, bleeding gums, excessive bleeding from cuts or injuries or after surgery, frequent nosebleeds that take a long time to stop, pain or tightness in the joints, blood in the urine or stool, unexplained irritability (in children).

7) People with haemophilia may also have a bleed inside their skull, although chances are small. Symptoms may include: a severe headache, vomiting, neck pain, sudden weakness, blurred or doubled vision, confusion, loss of coordination and balance, extreme sleepiness, convulsions, etc.

8) A blood test can help diagnose haemophilia and find out how severe it is. Currently, there's no known cure for haemophilia, however, treatment can help a person with the condition enjoy a good quality of life.

Sunday, 17 December 2017

*कहीं आप अनजाने में अपने परिवार को विषैला दूध तो नहीं पिला रहे हैं?*

मथुरा के ‘पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय एवं गौ अनुसंधान संस्थान’ में नेशनल ब्यूरो ऑफ जैनेटिक रिसोर्सेज, करनाल (नेशनल काउंसिल आफ एग्रीकल्चर रिसर्च - भारत सरकार) के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. देवेन्द्र सदाना द्वारा एक प्रस्तुति 4 सितम्बर को दी गई।

मथुरा विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के सामने दी गई प्रस्तुति में डॉ. सदाना ने जानकारी दी किः

अधिकांश विदेशी पशु (हॅालस्टीन, जर्सी आदि) के दूध में ‘बीटा कैसीन A1’ नामक प्रोटीन पाया जाता है जिससे अनेक असाध्य रोग पैदा होते हैं। पांच रोग होने के स्पष्ट प्रमाण वैज्ञानिकों को मिल चुके हैं –

*1. इस्चीमिया हार्ट डिसीज़* (रक्तवाहिका नाड़ियों का अवरुद्ध होना)
*2. मधुमेह-मिलाईटिस या डायबिट़िज टाईप-1* (पैंक्रिया का खराब होना जिसमें इन्सूलीन बनना बन्द हो जाता है)
*3. ऑटिज़्म* (मानसिक रूप से विकलांग बच्चों का जन्म होना)
*4. सिजोफ्रेनिया* (स्नायु कोषों का नष्ट होना तथा अन्य मानसिक रोग)
*5. सडन इनफैण्ट डैथ सिंड्रोम* (बच्चे किसी ज्ञात कारण के बिना अचानक मरने लगते हैं)

टिप्पणीः विचारणीय है कि हानिकारक A1 प्रोटीन के कारण यदि मनुष्य का सुरक्षा तंत्र नष्ट हो जाता है तो फिर न जाने कितने ही और रोग भी हो रहे होंगे, जिन पर अभी खोज नहीं हुई।

*दूध की संरचना*

आमतौर पर दूध में,
83 से 87% तक पानी
3.5 से 6% तक वसा (फैट)
4.8 से 5.2% तक कार्बोहाइड्रेड

3.1 से 3.9% तक प्रोटीन होती है। इस प्रकार कुल ठोस पदार्थ 12 से 15% तक होता है। लैक्टोज़ 4.7 से 5.1% तक है। शेष तत्व अम्ल, एन्जाईम विटामिन आदि 0.6 से 0.7% तक होते हैं।

गाय के दूध में पाए जाने वाले प्रोटीन 2 प्रकार के हैं। एक ‘केसीन’ और दूसरा है ‘व्हे’ प्रोटीन। दूध में केसीन प्रोटीन 4 प्रकार का मिला हैः

अल्फा एस 1 (39 से 46%)
अल्फा एस 2 (8 से 11%)
बीटा कैसीन (25 से 35%)
गामा केसीन (8 से 15%)

गाय के दूध में पाए गए प्रोटीन में लगभग एक तिहाई ‘बीटा कैसीन’ नामक प्रोटीन है। अलग-अलग प्रकार की गउओं में अनुवांशिकता (जैनेटिक कोड) के आधार पर ‘केसीन प्रोटीन’ अलग-अलग प्रकार का होता है जो दूध की संरचना को प्रभावित करता है, या यूं कहे कि उसमें गुणात्मक परिवर्तन करता है। उपभोक्ता पर उसके अलग-अलग प्रभाव हो सकते हैं।

*बीटा कैसीन A1, A2 में अन्तर क्या है?*

बीटा कैसीन के 12 प्रकार ज्ञात हैं जिनमें A1 और A2 प्रमुख हैं। A2 की एमिनो एसिड शृंखला (कड़ी) में 67 वें स्थान पर ‘प्रोलीन’ होता है। जबकि A1 प्रकार में यह ‘प्रोलीन’ के स्थान पर विषाक्त ‘हिस्टिडीन’ है। A1 में यह कड़ी कमजोर होती है तथा पाचन के समय टूट जाती है और विषाक्त प्रोटीन ‘बीटा केसो मार्फीन 7’ बनाती है।

*विदेशी गोवंश विषैला क्यों है?*

जैसा कि शुरू में बतलाया गया है कि विदेशी गोवंश में अधिकांश गउओं के दूध में ‘बीटा कैसीन A1’ नामक प्रोटीन पाया गया है। हम जब इस दूध को पीते हैं और इसमें शरीर के पाचक रस मिलते हैं व इसका पाचन शुरू होता है, तब इस दूध के A1 नामक प्रोटीन की 67वीं कमजोर कड़ी टूटकर अलग हो जाती है और इसके ‘हिस्टिडीन’ से ‘बी.सी.एम.7’ (बीटा केसो माफिन 7) का निर्माण होता है। सात कड़ियों वाला यह विषाक्त प्रोटीन ‘बी.सी.एम.7’ पूर्वोक्त सारे रोगों को पैदा करता है। शरीर के सुरक्षा तंत्र को नष्ट करके अनेक असाध्य रोगों का कारण बनता है।

*भारतीय गोवंश विशेष क्यों?*

करनाल स्थित भारत सरकार के करनाल स्थित ब्यूरो के द्वारा किए गए शोध के अनुसार भारत की 98% नस्लें A2 प्रकार के प्रोटीन वाली अर्थात् विषरहित हैं। इसके दूध की प्रोटीन की एमीनो एसिड चेन (बीटा कैसीन A2) में 67वें स्थान पर ‘प्रोलीन’ है और यह अपने साथ की 66वीं कड़ी के साथ मजबूती के साथ जुड़ी रहती है तथा पाचन के समय टूटती नहीं। 66वीं कड़ी में एमीनो ऐसिड ‘आइसोल्यूसीन’ होता है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि भारत की 2% नस्लों में A1 नामक एलिल (विषैला प्रोटीन) विदेशी गोवंश के साथ हुए ‘म्यूटेशन के कारण’ आया हो सकता है।

एन.बी.ए.जी.आर. – करनाल द्वारा भारत की 25 नस्लों की गउओं के 900 सैंम्पल लिए गए थे। उनमें से 97-98 % A2 A2 पाए गए गथा एक भी A1A1 नहीं निकला। कुछ सैंम्पल A1A2 थे जिसका कारण विदेशी गोवंश का सम्पर्क होने की सम्भावना प्रकट की जा रही है।

*गुणसूत्र* (chromosome)

गुणसूत्र जोड़ों में होते हैं, अतः स्वदेशी-विदेशी गोवंश की DNA जांच करने पर
‘A1 A1’
‘A1 A2’
‘A2 A2’
के रूप में गुणसूत्रों की पहचान होती है। स्पष्ट है कि विदेशी गोवंश ‘A1A1’ गुणसूत्र वाला तथा भारतीय ‘A2A2’ है।

केवल दूध के प्रोटीन के आधार पर ही भारतीय गोवंश की श्रेष्ठता बतलाना अपर्याप्त होगा। क्योंकि बकरी, भैंस, ऊँटनी आदि सभी प्राणियों का दूध विषरहित A2 प्रकार का है। भारतीय गोवंश में इसके अतिरिक्त भी अनेक गुण पाए गए हैं। भैंस के दूध के ग्लोब्यूल अपेक्षाकृत अधिक बड़े होते हैं तथा मस्तिष्क पर बुरा प्रभाव करने वाले हैं। आयुर्वेद के ग्रन्थों के अनुसार भी भैंस का दूध मस्तिष्क के लिए अच्छा नहीं, वातकारक (गठिया जैसे रोग पैदा करने वाला), गरिष्ठ व कब्जकारक है। जबकि गो दूग्ध बुद्धि, आयु, स्वास्थ्य व सौंदर्य वर्धक बतलाया गया है।

भारतीय गोवंश का दूध अनेक गुणों वाला है -

*1. बुद्धिवर्धक*
खोजों के अनुसार भारतीय गउओं के दूध में ‘सैरिब्रोसाईट’ नामक तत्व पाया गया है जो मस्तिष्क के ‘सैरिब्रम' को स्वस्थ-सबल बनाता है। यह स्नायु कोषों को बल देने वाला, बुद्धि वर्धक है।

*2. गाय के दूध से फुर्ती*
जन्म लेने पर गाय का बछड़ा 2 घंटे में ही चलने लगता है जबकि भैंस का पाडा 2 दिन बाद  चलता है। स्पष्ट है कि गाय एवं उसके दूध में भैंस की अपेक्षा अधिक फुर्ती होती है।

*3. आँखों की ज्योति, कद और बल को बढ़ाने वाला*
भारतीय गौ की आँत 180 फुट लम्बी होती है। गाय के दूध में केरोटीन नामक एक ऐसा उपयोगी एवं बलशाली पदार्थ मिलता है जो भैंस के दूध से कहीं अधिक प्रभावशाली होता है। बच्चों की लम्बाई और सभी के बल को बढ़ाने के लिए यह अत्यन्त उपयोगी होता है। आँखों की ज्योति को बढ़ाने के लिए यह अत्यन्त उपयोगी है। यह कैंसर रोधक भी है।

*4. असाध्य बिमारियों की समाप्ति*
गाय के दूध में स्टोनटियन नामक ऐसा पदार्थ भी होता है जो विकिरण (रेडियेशन) प्रतिरोधक होता है। यह असाध्य बिमारियों को शरीर पर आक्रमण करने से रोकने का कार्य भी करता है। रोगाणुओं से लड़ने की क्षमता को बढ़ाता है जिससे रोग का प्रभाव क्षीण हो जाता है।

*5. रामबाण है गाय का दूध – ओमेगा 3 से भरपूर*
वैज्ञानिक अनुसंधान के बाद यह सिद्ध हो चुका है कि फैटी एसिड ओमेगा 3 (यह एक ऐसा पौष्टिकतावर्धक तत्व है, जो सभी रोगों की समाप्ति के लिए रामबाण है) केवल गो माता के दूध में सबसे अधिक मात्रा में पाया जाता है। आहार में ओमेगा 3 से डी. एच. तत्व बढ़ता है। इसी तत्व से मानव-मस्तिष्क और आँखों की ज्योति बढ़ती है। डी. एच. में दो तत्व ओमेगा 3 और ओमेगा 6 बताये जाते हैं। मस्तिष्क का संतुलन इसी तत्व से बनता है। आज विदेशी वैज्ञानिक इसके कैप्सूल बनाकर दवा के रूप में इसे बेचकर अरबों-खरबों रुपये का व्यापार कर रहे हैं।

*6. विटामिन से भरपूर-माँ के दूध के समकक्ष*
प्रो. एन. एन. गोडबोले के अनुसार गाय के दूध में अल्बुमिनाइड, वसा, क्षार, लवण तथा कार्बोहाइड्रेड तो हैं ही साथ ही समस्त विटामिन भी उपलब्ध हैं। यह भी पाया गया कि देशी गाय के दूध में 8% प्रोटीन, 0.7% खनिज व विटामिन ए, बी, सी, डी व ई प्रचुर मात्रा में विद्यमान हैं, जो गर्भवती महिलाओं व बच्चों के लिए अत्यन्त उपयोगी होते हैं।

*7. कॅालेस्ट्राल से मुक्ति*
वैज्ञानिकों के अनुसार कि गाय के दूध से कोलेस्ट्रोल नहीं बढ़ता। हृदय रोगियों के लिए यह बहुत उपयोगी माना गया है।

*8. टी.बी. और कैंसर की समाप्ति*
क्षय (टी.बी) रोगी को यदि गाय के दूध में शतावरी मिलाकर दी जाये तो टी.बी. रोग समाप्त हो जाता है। एसमें एच.डी.जी.आई. प्रोटीन होने से रक्त की शिराओं में कैंसर प्रवेश नहीं कर सकता।

*9. हृदय रोगियों के लिए गाय का दूध ही सर्वोत्तम*
इन्टरनेशनल कार्डियोलॅाजी के अध्यक्ष डा. शान्तिलाल शाह ने कहा है कि भैंस के दूध में लाँगचेन फेट होता है जो नसों में जम जाता है। फलस्वरूप हार्टअटैक की सम्भावना अधिक हो जाती ही। इसलिए हृदय रोगियों के लिए गाय का दूध ही सर्वोत्तम है। भैंस के दूध के ग्लोब्यूल्ज़ भी आकार में अधिक बड़े होते हैं तथा स्नायु कोषों के लिए हानिकारक हैं।

*10.  विटामिन B12*
B12 भारतीय गाय की बड़ी आंतों में अत्यधिक पाया जाता है, जो व्यक्ति को निरोगी एवं दीर्घायु बनाता है। इससे बच्चों एवं बड़ों को शारीरिक विकास में बढ़ोतरी तो होती ही है साथ ही खून की कमी जैसी बिमारियां (एनीमिया) भी ठीक हो जाती है।

*11. गाय के दूध में दस गुण*
चरक संहिता (सूत्र 27/217) में गाय के दूध में दस गुणों का वर्णन है-

स्वादु, शीत, मृदु, स्निग्धं बहलं श्लक्ष्णपिच्छिलम्।
गुरु मंदं प्रसन्नं च गल्यं दशगुणं पय॥

अर्थात्- गाय का दूध स्वादिष्ट, शीतल, कोमल, चिकना, गाढ़ा, श्लक्ष्ण, लसदार, भारी और बाहरी प्रभाव को विलम्ब से ग्रहण करने वाला तथा मन को प्रसन्न करने वाला होता है।

*12. केवल भारतीय देसी नस्ल की गाय का दूध ही पौष्टिक*
करनाल के नेशनल ब्यूरो आफ एनिमल जैनिटिक रिसोर्सेज (एन.बी.ए.जी.आर.) संस्था ने अध्ययन कर पाया कि भारतीय गायों में प्रचुर मात्रा में A2 एलील जीन पाया जाता हैं, जो उन्हें स्वास्थ्यवर्धक दूध उत्पन्न करने में मदद करता है। भारतीय नस्लों में इस जीन की फ्रिक्वेंसी 100% तक पाई जाती है।

*13. कोलेस्ट्रम (खीस) में है जीवनी शक्ति*
प्रसव के बाद गाय के दूध में ऐसे तत्व होते हैं जो अत्यन्त मूल्यवान, स्वास्थ्यवर्धक हैं। इसलिए इसे सूखाकर व इसके कैप्सूल बनाकर, असाध्य रोगों की चिकित्सा के लिए इसे बेचा जा रहा है। यही कारण है कि जन्म के बाद बछड़े, बछिया को यह दूध अवश्य पिलाना चाहिए। इससे उसकी जीवनी शक्ति आजीवन बनी रहती है। इसके अलावा गौ उत्पादों में कैंसर रोधी तत्व एनडीजीआई भी पाया गया है जिस पर US पेटेन्ट प्राप्त है।

🌱तुलसी एक,फायदे अनेक

हमारे शास्त्रों के अनुसार तीन सुरक्षा चक्र पहली गौ माता दूसरी तुलसी तीसरी रसोईघर के मसाले (औषधि)

तुलसी

तुलसी मुख्य रूप से पांच प्रकार के पायी जाती है ! श्याम तुलसी, राम तुलसी, श्वेत/विश्नू तुलसी, वन तुलसी, और नींबू तुलसी ।

यह संसार की एक बेहतरीन एंटी-ऑक्सीडेंट , एंटी- बैक्टीरियल, एंटी- वायरल , एंटी- फ्लू, एंटी- बायोटिक , एंटी-इफ्लेमेन्ट्री व एंटी – डिजीज है ।

✔तुलसी अर्क के दो बून्द एक ग्लास पानी में या तीन बून्द एक लीटर पानी में डाल कर पांच मिनट के बाद उस जल को पीना चाहिए। इससे पेयजल विष् और रोगाणुओं से मुक्त होकर स्वास्थवर्धक पेय हो जाता है ।

✔तुलसी अर्क २०० से अधिक रोगो में लाभदायक है । जैसे के फ्लू , स्वाइन फ्लू, डेंगू , जुखाम , खासी , प्लेग, मलेरिया , जोड़ो का दर्द, मोटापा, ब्लड प्रेशर , शुगर, एलर्जी , पेट के कीड़ो , हेपेटाइटिस , जलन, मूत्र सम्बन्धी रोग, गठिया , दम, मरोड़, बवासीर , अतिसार, आँख का दर्द , दाद खाज खुजली, सर दर्द, पायरिया नकसीर, फेफड़ो सूजन, अल्सर , वीर्य की कमी, हार्ट ब्लोकेज आदि ।

✔तुलसी एक बेहतरीन विष नाशक तथा शरीर से हानिकारक विष (toxins ) को बाहर निकालती है ।

✔तुलसी स्मरण शक्ति को बढ़ाता है ।

✔तुलसी शरीर के लाल रक्त सेल्स (Haemoglobin) को बढ़ने में अत्यंत सहायक है ।

✔तुलसी भोजन के बाद एक बूँद सेवन करने से पेट सम्बन्धी बीमारिया बहोत काम लगाती है।

✔तुलसी के 4 – 5 बूँदे पीने से महिलाओ को गर्भावस्था में बार बार होने वाली उलटी के शिकायत ठीक हो जाती है ।

✔आग के जलने व किसी जहरीले कीड़े के कांटने से तुलसी को लगाने से विशेष रहत मिलती है।

✔दमा व खाँसी में तुलसी के दो बुँदे थोड़े से अदरक के रास तथा शहद के साथ मिलकर सुबह – दोपहर – शाम सेवन करे।

✔यदि मुँह में से किसी प्रकार की दुर्गन्ध आती हो तो तुलसी के एक बूँद मुँह में डाल ले दुर्गन्ध तुरंत दूर हो जाएगी।

✔दांत का दर्द, दांत में कीड़ा लगना , मसूड़ों में खून आना तुलसी के 4 – 5 बूँदे पानी में डालकर कुल्ला करना चाहिए।

✔कान का दर्द, कण का बहना, तुलसी हल्का गरम करके एक -एक बूंद कान में टपकाए।

✔नाक में पिनूस रोग हट जाता है, इसके अतिरिक्त फोड़े – फुंसिया भी निकल आती है, दोनों रोगो में बहुत तकलीफ होती है I तुलसी को हल्का सा गरम करके एक – एक बूंद नाक में टपकाएं।

✔गले में दर्द, गले व मुँह में छाले , आवाज़ बैठ जाना : तुलसी के 4 – 5 बूँदे गरम पानी में डालकर कुल्ला करना चाहिए।

✔सर दर्द, बाल क्हाड्णा, बाल सफ़ेद होना व सिकरी तुलसी की 8 – 10 मि.ली। हर्बल हेयर आयल के साथ मिलाकर सर, माथे तथा कनपटियो पर लगाये।

✔तुलसी के 8 – 10 बूँदे मिलकर शरीर में मलकर रात्रि में सोये , मच्छर नहीं काटेंगे।

✔कूलर के पानी में तुलसी के 8 – 10 बूँदे डालने से सारा घर विषाणु और रोगाणु से मुक्त हो जाता है, तथा मक्खी – मच्छर भी घर से भाग जाते है।

✔जूएं व लिखे तुलसी और नीबू का रस समान मात्रा में मिलाकर सर के बालो में अच्छे तरह से लगाये I 3 – 4 घंटे तक लगा रहने दे। और फिर धोये अथवा रात्रि को लगाकर सुबह सर धोए।। जुएं व लिखे मर जाएगी।

✔त्वचा की समस्या में निम्बू रास के साथ तुलसी के 4 – 5 बूँदे डालकर प्रयोग करे।

✔तुलसी में सुन्दर और निरोग बनाने की शक्ति है। यह त्वचा का कायाकल्प कर देती है I यह शरीर के खून को साफ करके शरीर को चमकीला बनती है।

✔तुलसी की दो बूँदे एलो जैल क्रीम में मिलाकर चेहरे पर सुबह व रात को सोते समय लगाने पर त्वचा सुन्दर व कोमल हो जाती है तथा चेहरे से प्रत्येक प्रकार के काले धेरे, छाइयां , कील मुँहासे व झुरिया नष्ट हो जाती है।

✔सफ़ेद दाग : 10 मि.लि. तेल व नारियल के तेल में 20 बूँदें तुलसी डालकर सुबह व रात सोने से पहले अच्छी तरह से मले।

✔तुलसी के नियमित उपयोग से कोलेस्ट्रोल का स्तर कम होने लगता है, रक्त के थक्के जमने कम हो जाते है, व हार्ट अटैक और कोलैस्ट्रोल की रोकथाम हो जाती है।

✔तुलसी को किसी भी अच्छी क्रीम में मिला कर लगाने से प्रसव के बाद पेट पर बनने वाले लाइने ( स्ट्रेच मार्क्स ) दूर हो जाते है।
🌱तुलसी एक,फायदे अनेक।

अमर शहीद राष्ट्रगुरु, आयुर्वेदज्ञाता, होमियोपैथी ज्ञाता स्वर्गीय भाई राजीव दीक्षित जी के सपनो (स्वस्थ व समृद्ध भारत) को पूरा करने हेतु अपना समय दान दें